खिलौना, पहेली, कहानी और चित्र वाले कार्ड—शुरुआती पढ़ाई में इन सबकी अपनी जगह है। एनसीईआरटी का जादुई पिटारा इन्हें सीखने-सिखाने की सामग्री के रूप में एक साथ रखता है। 20 फरवरी 2023 को नई दिल्ली में इसका शुभारंभ हुआ था। इसे तीन से आठ वर्ष के बच्चों के लिए विकसित किया गया।
इस आयु समूह में स्कूल से पहले के वर्ष ही नहीं, पहली और दूसरी कक्षा भी शामिल हैं। शिक्षा मंत्रालय की लॉन्च सूचना में खेल के माध्यम से सीखने को इसका केंद्रीय विचार बताया गया। आधार राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के बुनियादी चरण का था, जिसे अक्टूबर 2022 में जारी किया गया था।
पिटारे में क्या है
लॉन्च के विवरण में खिलौने, पहेलियाँ, कठपुतलियाँ, पोस्टर, फ्लैश कार्ड, कहानियों की किताबें और अभ्यास-पत्र शामिल हैं। सामग्री में स्थानीय संस्कृति, भाषा और सामाजिक संदर्भ को जगह देने की बात भी कही गई। यानी बच्चे के आसपास की दुनिया सीखने का हिस्सा है।
पिटारे के साथ शिक्षकों की तैयारी को भी जोड़ा गया। शिक्षा मंत्रालय की सूचना में एनसीईआरटी की प्रशिक्षक संदर्शिका का उल्लेख है, जो बुनियादी चरण के पाठ्यचर्या लक्ष्यों से जुड़ी है। सामग्री को डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने और अलग मातृभाषाओं में पहुँच बढ़ाने पर भी उसी अवसर पर जोर दिया गया।
सामग्री के साथ भाषा की जगह
फरवरी 2023 की घोषणा में पिटारे की सामग्री 13 भारतीय भाषाओं में होने की जानकारी दी गई थी। उसी अवसर पर मातृभाषा में सामग्री के विस्तार पर जोर दिया गया। यह उस घोषणा का भाषाई दायरा है।
यह सामग्री की फरवरी 2023 वाली शुरुआत का परिचय है। घोषणा में बताए गए भाषा-विस्तार और डिजिटल पहुँच के आग्रह को बाद की पूरी हुई उपलब्धि समझना ठीक नहीं होगा। पिटारे का केंद्रीय विचार साफ है: शुरुआती कक्षाओं में किताब के साथ खेल और स्थानीय अनुभव को भी सीखने की सामग्री बनाना।
मुख्य बातें
- जादुई पिटारा का शुभारंभ 20 फरवरी 2023 को तीन से आठ वर्ष के बच्चों के लिए हुआ।
- सामग्री में खिलौने, पहेलियाँ, कठपुतलियाँ, कहानियाँ और अभ्यास-पत्र शामिल हैं।
- फरवरी 2023 की घोषणा में सामग्री 13 भारतीय भाषाओं में होने की जानकारी दी गई थी।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।



