जहां भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, देश का विनिर्माण क्षेत्र आत्मनिर्भरता और प्रगति के स्तंभ के रूप में खड़ा है। पिछले 12 वर्षों में, मेक इन इंडिया विजन के तहत साहसिक सुधारों ने उद्योगों को नया आकार दिया है, जिससे देश एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित हो गया है।
रक्षा उपकरण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और भारी मशीनरी अब विश्व स्तरीय मानकों पर उत्पादित की जाती हैं, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में मांग की पूर्ति करते हैं।
इस गति को और तेज करने के लिए, सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन ( पीएलआई) योजना, पीएम गतिशक्ति, राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति, भव्य और इलेक्ट्रॉनिक्स और एमएसएमई सेक्टरों के लिए जैसी कई पहल शुरू की हैं ।
विनिर्माण क्षेत्र अब सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 16-17 प्रतिशत का योगदान देता है और 27 मिलियन से अधिक श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। 2022-23 से 2025-26 के दौरान संशोधित श्रृंखला के अनुसार स्थिर कीमतों (2022-23 आधार) पर विनिर्माण जीवीए की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) 10.88 प्रतिशत है।
जुलाई 2026 में व्यापारिक निर्यात 44.24 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 36.98 बिलियन डॉलर था। जून 2026 में विनिर्माण उत्पादन में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ये संकेतक विनिर्माण को भारत के आर्थिक विकास के केंद्रीय चालक के रूप में दर्शाते हैं।
पिछले एक दशक में भारत के रक्षा उद्योग में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। केंद्रित नीतियों, लक्षित निवेश और आत्मनिर्भरता के लिए मजबूत प्रयासों ने देश को रक्षा उपकरणों के एक महत्वपूर्ण उत्पादक और निर्यातक में बदल दिया है।
भारत तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ है, जिसने उत्पादन और निर्यात दोनों में असाधारण वृद्धि हासिल की है। इलेक्ट्रॉनिक्स पर राष्ट्रीय नीति, स्पेक्स, ईएमसी 2.0 और पीएलआई जैसी लगातार नीतियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को नया आकार दिया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) जैसी योजनाओं ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) इकोसिस्टम को और मजबूत किया, जिससे विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला।
इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन वित्त वर्ष 2024-25 के 11.32 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 13.11 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो वर्ष- दर- वर्ष 15.8 प्रतिशत की वृद्धि है।
सेमीकंडक्टर गंतव्य के रूप में भारत का उदय इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निरंतर सुधारों पर आधारित है। सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम ( सेमीकॉन 1.0) को दिसंबर 2021 में 76,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया था।
इसे घरेलू सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए लॉन्च किया गया था। इसके आधार पर, सेमीकॉन 2.0 को जुलाई, 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के कुल बजट परिव्यय के साथ अनुमोदित किया गया है।
जुलाई 2026 तक, 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ बारह विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी दी गई है। इनमें एक सिलिकॉन फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, एक एकीकृत गैलियम नाइट्राइड माइक्रो एलईडी डिस्प्ले फैब और नौ पैकेजिंग इकाइयां शामिल हैं। साथ में, उनसे उपभोक्ता उपकरणों, औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार और एयरोस्पेस में चिप आवश्यकताओं को पूरा करने की उम्मीद है।
बारह स्वीकृत प्रस्तावों में से, तीन कंपनियों, माइक्रोन, केन्स और सीजी सेमी ने पहले ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। एक और कंपनी द्वारा 2026 में परिचालन शुरू करने की उम्मीद है, जो भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण आधार को और मजबूत करेगी।
भारत का मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र तेजी से बढ़ा है, जिससे घरेलू उत्पादन, निर्यात और मूल्यवर्धन सुदृढ़ हुआ है।
इस योजना को 15 जुलाई, 2026 को 62,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ अनुमोदित किया गया था। यह उत्पादन को बढ़ावा देने, घरेलू मूल्य संवर्धन, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर ध्यान केंद्रित करती है। पांच साल की यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से वित्त वर्ष 2030-31 तक चलेगी। स्थानीय सोर्सिंग, भारतीय ब्रांड, डिजाइन और अनुसंधान एवं विकास के लिए अतिरिक्त सहायता के साथ प्रोत्साहन 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक है।
वैश्विक फार्मास्युटिकल उद्योग में भारत मात्रा में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर है। यह दुनिया की 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं और टीकों के एक बड़े हिस्से की आपूर्ति करके विश्व भर में किफायती स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उत्पादन, निर्यात और घरेलू नवाचार में लगातार वृद्धि ने एक विश्वसनीय वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की स्थिति मजबूत की है।
भारत का वस्त्र और परिधान उद्योग इसके सबसे महत्वपूर्ण विनिर्माण सेक्टरों में से एक है। यह कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो 45 मिलियन से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है और एमएसएमई के नेतृत्व वाले औद्योगिक विकास में सहायता करता है।
घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए समुद्री सेक्टर में कई पहल शुरू की गई हैं।
सितंबर, 2025 में, घरेलू जहाज निर्माण क्षमता, समुद्री वित्तपोषण और कौशल को मजबूत करने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के व्यापक पैकेज की घोषणा की गई थी। इसके निम्नलिखित तीन घटक हैं:
घरेलू कंटेनर निर्माण क्षमता का विस्तार करने और वैश्विक कंटेनर आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 में सीएमएएस की घोषणा की गई थी।
भारत में एक मजबूत ऑटोमोबाइल उद्योग है, जो व्यापक विनिर्माण क्षमताओं और एक बड़े ऑटो-कंपोनेंट इकोसिस्टम द्वारा समर्थित है। यह दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और वैश्विक स्तर पर यात्री और वाणिज्यिक वाहनों के लिए तीसरा सबसे बड़ा बाजार है। यह सेक्टर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को भी आगे बढ़ा रहा है, जिसे ईवी अंगीकरण अपनाने और सरकारी पहलों का समर्थन प्राप्त है।
भारत के सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का तेजी से विस्तार हुआ है, जिससे सोलर सेल और मॉड्यूल का घरेलू उत्पादन मजबूत हुआ है। घरेलू पीवी बाजार का मूल्य लगभग 32,400 करोड़ रुपये है और 2030 तक इसके मजबूती से बढ़ने की उम्मीद है।
भारत का विनिर्माण सेक्टर आज स्थिर प्रगति, गहरी क्षमता और पूरे उद्योग में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। निरंतर नीतिगत समर्थन और बढ़ती निजी भागीदारी वर्ष-दर-वर्ष इस नींव को सुदृढ़ करना जारी रखती है। जैसे-जैसे नई क्षमताएं परिपक्व हो रही हैं, यह सेक्टर अपनी वैश्विक भूमिका का विस्तार करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। आने वाले वर्ष व्यापक अवसर, अधिक मूल्य सृजन और एक मजबूत आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का वादा करते हैं।
रसायन और उर्वरक मंत्रालय: फार्मास्यूटिकल्स विभाग:
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय:
साइट को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केन्द्र (एनआईसी) द्वारा होस्ट किया जाता है । इस पर सूचनाएं पत्र सूचना कार्यालय, "ए" विंग, शास्त्री भवन, डॉ राजेंद्र प्रसाद रोड़, शास्त्री भवन, नई दिल्ली – 110001, फोन : 23389338 द्वारा उपलब्ध करवाई जाती है और अद्यतित की जाती है ।
मुख्य बातें
- जहां भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, देश का विनिर्माण क्षेत्र आत्मनिर्भरता और प्रगति के स्तंभ के रूप में खड़ा है।
- पिछले 12 वर्षों में, मेक इन इंडिया विजन के तहत साहसिक सुधारों ने उद्योगों को नया आकार दिया है, जिससे देश एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित…
- रक्षा उपकरण, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण और भारी मशीनरी अब विश्व स्तरीय मानकों पर उत्पादित की जाती हैं, जो घरेलू और अंतरराष…
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 21 सितंबर 2026।


